Diary Ke Panne

बुधवार, 15 जुलाई 2026

Parallel Lines


बेटे ने आज पूछा पापा पैरेलल लाइन्स क्या होती हैं और वे दोनों एक दूसरे से कभी क्यों नहीं मिलती। ख़याल आया यही तो हमें स्कूल में पढ़ाया गया था 

“दो समांतर रेखाएँ कभी नहीं मिलतीं।”


हमने इस वाक्य को गणित का नियम समझकर याद कर लिया। लेकिन कभी यह नहीं पूछा कि यह बात किस दुनिया की है?

किस ब्रह्मांड की? किस ज्यामिति की?


यूक्लिड की Geometry कहती है कि यदि दुनिया सपाट है, यदि धरती एक flat surface है, तो दो parallel lines कभी नहीं मिलेंगी। वे साथ-साथ चलेंगी, बराबर दूरी बनाए रखेंगी, लेकिन एक-दूसरे को कभी छुएँगी नहीं। यही उनका धर्म है। यही उनकी पहचान है। यही उनका अस्तित्व है।


लेकिन फिर गणित का एक दूसरा संसार सामने आता है जिसे हम  ज्योमेट्राइक नाम से जानते हैं ।


वह कहती है 

नहीं…

यह ब्रह्मांड सपाट नहीं है इसीलिए यहाँ हर parallel line अंततः मिलती है।

मगर कहाँ? Infinity पर… अनंत पर।


यहीं से मेरे भीतर एक सवाल जन्म लेता है। अगर दो parallel lines मिल गईं… तो क्या वे अब भी parallel हैं? क्योंकि parallel होने का अर्थ ही यह था कि वे कभी नहीं मिलेंगी। अगर मिलना उनकी नियति बन गया… तो क्या उनका स्वभाव बचा? या उनका अस्तित्व ही बदल गया?


और शायद… यही प्रश्न मोहब्बत भी पूछती है। कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में रेल की पटरियों की तरह आते हैं। एक ही दिशा… एक ही सफ़र… एक ही मंज़िल की तरफ़ बढ़ते हुए… मगर मिलने की इजाज़त नहीं। साथ चलना उनकी तक़दीर है, मिल जाना नहीं। या वे लोग जो इस समय रेखा में हमसे बिछड़ गए हैं क्या वे किसी समांतर दुनिया में चले गए हैं जो अब कभी नहीं मिलेंगे ? 


लेकिन फिर Projective Geometry फिर से आकर कहती है

रुको… क्षितिज को देखो। वहाँ ज़मीन और आसमान मिल रहे हैं।

और यहीं मुझे सबसे बड़ा विरोधाभास दिखाई देता है। अगर सचमुच वे मिल गए… तो क्या वे अब भी ज़मीन और आसमान हैं? नहीं। वे अब क्षितिज हैं। न पूरी तरह ज़मीन… न पूरी तरह आसमान… मिलन ने दोनों की पहचान बदल दी। यही तो paradox है। जिस मिलन की इच्छा थी… उसी मिलन ने दोनों का अस्तित्व बदल दिया। और शायद… प्रेम और चाहना का  का सबसे बड़ा दुःख भी यही है। हम सोचते हैं कि जो लोग हमें छोड़ गए हैं अगर इस स्पेस टाइम में दोबारा हमसे मिल जाते तो सब पहले जैसा हो जाता। लेकिन वक्त कभी किसी को पहले जैसा रहने नहीं देता।


इंतज़ार सिर्फ़ दूरी नहीं बढ़ाता… इंसान भी बदल देता है। इसीलिए मुझे लगता है कि Projective Geometry का Infinity कोई जगह नहीं है। वह समय है। और उस समय तक पहुँचते-पहुँचते… parallel lines भी बदल चुकी होती हैं, ज़मीन और आसमान भी बदल चुके होते हैं, और प्रेम करने वाले भी। मिलन तो होता है…लेकिन मिलने वाले नहीं बचते।


शायद इसी वजह से इस दुनिया में सारे रिश्ते अधूरे हैं लोग मिलते हैं बिछड़ जाते हैं और वे समानांतर चलकर अमर हो जाते हैं।


-एमजे  

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